1957 की क्लासिक फिल्म 'मदर इंडिया' के सेट पर भड़की वह भयानक आग सिर्फ एक हादसा नहीं थी, बल्कि बॉलीवुड की सबसे यादगार लव स्टोरीज में से एक की शुरुआत थी। जब धधकती लपटों के बीच फंसी नरगिस की चीखें गूंजीं, तो सुनील दत्त ने अपनी जान की परवाह किए बिना आग में छलांग लगा दी। इस एक घटना ने नरगिस को न सिर्फ मौत के मुंह से निकाला, बल्कि उनके टूटे दिल को एक ऐसा सहारा दिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।
उमरा गांव का वह खौफनाक मंजर
बात 1957 की है, जब दिग्गज डायरेक्टर महबूब खान गुजरात के सूरत के पास उमरा गांव में 'मदर इंडिया' के एक बहुत ही अहम सीन की शूटिंग कर रहे थे। सीन के मुताबिक, सूखी घास और खलिहान में आग लगनी थी और नरगिस (राधा) को उस आग के बीच में फंसना था।
सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा था, लेकिन तभी अचानक हवा का रुख बदल गया। आग ने बेहद विकराल रूप ले लिया और पूरे सेट पर भगदड़ मच गई। नरगिस सचमुच आग के गोल घेरे में बुरी तरह घिर गईं और धुएं के बीच से उनकी रोने और बचाने की आवाजें आने लगीं।
जब सुनील दत्त बने असली जिंदगी के हीरो
सेट पर मौजूद क्रू मेंबर्स डर के मारे पीछे हट गए थे और किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। तभी फिल्म में नरगिस के बागी बेटे 'बिरजू' का किरदार निभा रहे सुनील दत्त आगे आए। उन्होंने बिना एक पल गंवाए एक सूती कंबल उठाया और जलती लपटों के बीच छलांग लगा दी।
सुनील दत्त ने नरगिस को आग से सुरक्षित बाहर तो निकाल लिया, लेकिन इस कोशिश में वे खुद बेहद गंभीर रूप से झुलस गए। उनके सीने, चेहरे और हाथों पर गहरे जख्म आए। इस बहादुरी ने नरगिस के मन में सुनील दत्त के प्रति सम्मान और प्यार का बीजारोपण कर दिया, क्योंकि इससे पहले किसी ने उनके लिए अपनी जान दांव पर नहीं लगाई थी।
अस्पताल का वो दौर और पनपता प्यार
हादसे के बाद सुनील दत्त को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। नरगिस ने बिना किसी झिझक के दिन-रात अस्पताल में रहकर सुनील दत्त की तीमारदारी की। वे खुद सुनील दत्त की पट्टियां बदलती थीं और उनका ध्यान रखती थीं।
उस समय नरगिस अपनी जिंदगी के बेहद कठिन दौर से गुजर रही थीं। राज कपूर के साथ उनका सालों पुराना रिश्ता टूट चुका था और वे भावनात्मक रूप से पूरी तरह बिखर चुकी थीं। सुनील दत्त की सादगी, ईमानदारी और निस्वार्थ देखभाल ने नरगिस के जख्मों पर मरहम का काम किया। अस्पताल के उसी कमरे में दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए।
मां-बेटे का रोल और सीक्रेट मैरिज का सच
दोनों के बीच प्यार गहरा हो चुका था, लेकिन उनके सामने एक बहुत बड़ी व्यावहारिक चुनौती थी। फिल्म 'मदर इंडिया' में नरगिस सुनील दत्त की मां का किरदार निभा रही थीं।
डायरेक्टर महबूब खान को डर था कि अगर दर्शकों को इनके अफेयर या शादी की खबर मिल गई, तो लोग पर्दे पर मां और बेटे के इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करेंगे और फिल्म फ्लॉप हो सकती है। इसी वजह से दोनों ने अपने रिश्ते को दुनिया से छुपाकर रखा। उन्होंने 11 मार्च 1958 को बेहद गुपचुप तरीके से शादी रचाई और फिल्म की ऐतिहासिक सफलता के बाद ही अपनी शादी का खुलासा किया।
'मदर इंडिया' के सेट से जुड़ी 3 खास बातें
- अनियंत्रित आग: हवा के अचानक बदलने से सूखे पुआल में लगी आग बेकाबू हो गई थी, जिसे केवल सीन के लिए सीमित रखना था।
- गंभीर बर्न इंजरी: नरगिस को सुरक्षित निकालने में सुनील दत्त का सीना और चेहरा बुरी तरह झुलस गया था, जिसके निशान सालों तक रहे।
- इतिहास रचने वाली फिल्म: यही फिल्म आगे चलकर ऑस्कर (Best Foreign Language Film) में नामांकित होने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी।
सेट पर लगी उस आग ने नरगिस का शरीर तो सुरक्षित बचा लिया, लेकिन उनके जीवन में बसे पुराने दर्दों को हमेशा के लिए भस्म कर दिया। सुनील दत्त और नरगिस की यह लव स्टोरी केवल किसी फिल्मी पटकथा जैसी नहीं थी, बल्कि यह आग की लपटों के बीच जन्मे उस सच्चे विश्वास की दास्तान थी जो नरगिस की आखिरी सांस तक कायम रहा।
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