जब साल 2004 में आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'स्वदेश' सिनेमाघरों में आई, तो इसने हिंदी सिनेमा का एक नया चेहरा दुनिया के सामने रखा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शाहरुख खान की यह क्लासिक फिल्म सिर्फ अपनी बेहतरीन कहानी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा में एक अनोखा इतिहास रचने के लिए भी जानी जाती है? 'स्वदेश' पहली ऐसी भारतीय फिल्म थी, जिसे अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी 'नासा' (NASA) के असली परिसर के भीतर शूट करने की खास इजाजत मिली थी।
नासा के 'गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर' में हुई थी शूटिंग
फिल्म में शाहरुख खान ने 'मोहन भार्गव' का किरदार निभाया था, जो नासा में एक सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में काम करता है। निर्देशक आशुतोष गोवारिकर इस किरदार और उसके माहौल को पूरी तरह से प्रामाणिक बनाना चाहते थे। यही वजह थी कि उन्होंने कोई नकली सेट बनाने के बजाय सीधे अमेरिका के मैरीलैंड स्थित नासा के 'गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर' (Goddard Space Flight Center) का रुख किया।
फिल्म के शुरुआती दृश्यों में मोहन भार्गव को नासा के विशाल रिसर्च लैब, कंट्रोल रूम और सैटेलाइट मॉनिटरिंग रूम में काम करते देखा जा सकता है। यह कोई सेट नहीं, बल्कि नासा का असली वर्किंग स्पेस था, जहां वैज्ञानिक दिन-रात वास्तविक अंतरिक्ष मिशनों पर काम करते हैं।
जीपीएम (GPM) सैटेलाइट और असली वैज्ञानिकों की मौजूदगी
फिल्म में दिखाए गए प्रोजेक्ट 'GPM' (Global Precipitation Measurement) का नाम कोई काल्पनिक नाम नहीं था। यह नासा का एक बेहद महत्वपूर्ण वास्तविक मिशन था, जिसका मकसद पृथ्वी पर बारिश और बर्फबारी के सटीक पैटर्न को ट्रैक करना था। फिल्म में मोहन भार्गव इसी प्रोजेक्ट का नेतृत्व करते नजर आते हैं।
इस ऐतिहासिक शूटिंग से जुड़े कुछ ऐसे अनसुने तथ्य हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं:
- असली वैज्ञानिक बने बैकग्राउंड आर्टिस्ट: लैब वाले दृश्यों में बैकग्राउंड में दिखने वाले कई लोग पेशेवर जूनियर आर्टिस्ट नहीं, बल्कि नासा में कार्यरत असली वैज्ञानिक और शोधकर्ता थे।
- एक्टिव वर्कस्टेशन पर काम: शाहरुख खान ने जिन कंप्यूटर मॉनिटर्स पर काम करते हुए सीन दिए, वे वास्तव में नासा के लाइव डेटा और सैटेलाइट फीड से जुड़े हुए थे।
- लॉन्च पैड के पास शूटिंग: गोवारिकर की टीम को नासा के अति-संवेदनशील लॉन्च एरिया के आसपास भी कुछ विजुअल्स कैप्चर करने की दुर्लभ मंजूरी मिली थी।
9/11 के बाद कड़े सुरक्षा पहरे में कैसे मिली इजाजत?
साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 के आतंकवादी हमलों के बाद नासा जैसी संवेदनशील सरकारी एजेंसियों में बाहरी लोगों और विदेशी मीडिया का प्रवेश लगभग नामुमकिन कर दिया गया था। ऐसे माहौल में किसी भारतीय फिल्म क्रू को वहां शूटिंग की अनुमति मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं था।
आशुतोष गोवारिकर को नासा के अधिकारियों को मनाने में महीनों का समय लगा। उन्होंने नासा की जनसंपर्क टीम के सामने फिल्म की पूरी स्क्रिप्ट रखी और यह साबित किया कि फिल्म में नासा के काम को बेहद सम्मानजनक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दिखाया जाएगा। गोवारिकर की प्रतिबद्धता को देखकर नासा प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा शर्तों के साथ शूटिंग की अनुमति दे दी।
शाहरुख खान का अनुभव और वह मशहूर 'आरवी' वैन
नासा परिसर में शूटिंग के दौरान शाहरुख खान का अंदाज बेहद पेशेवर था। नासा के कई वैज्ञानिकों ने बाद में इंटरव्यू में बताया कि शाहरुख न सिर्फ अपने संवादों को लेकर संजीदा थे, बल्कि वे जीपीएम सैटेलाइट की तकनीक को समझने में भी काफी दिलचस्पी ले रहे थे।
फिल्म में मोहन भार्गव जिस आलीशान 'आरवी' (Recreational Vehicle) यानी वैन से भारत के गांवों का सफर करता है, उसकी प्रेरणा भी क्रू को अमेरिका में शूटिंग के दौरान ही मिली थी। अमेरिका में आउटडोर शूटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली इस लग्जरी वैन को खास तौर पर भारत मंगवाकर फिल्म के दृश्यों में शामिल किया गया था।
सिनेमाई इतिहास का एक अनमोल पन्ना
रिलीज के वक्त भले ही 'स्वदेश' ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई न की हो, लेकिन समय के साथ यह भारतीय सिनेमा की सबसे महान फिल्मों में शुमार हो गई। नासा के हाई-टेक कंट्रोल रूम से निकलकर भारत के एक दूरदराज गांव में बिजली पहुंचाने तक की मोहन भार्गव की यह यात्रा आज भी दर्शकों के दिलों में देशभक्ति और जड़ों से जुड़ने की एक अनोखी अलख जगाती है।
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