पंचायत' का 'फूलेरा' असल में कहां है? जानिए मध्य प्रदेश के उस गुमनाम गांव की कहानी जो अब बन चुका है टूरिस्ट स्पॉट

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पंचायत' का 'फूलेरा' असल में कहां है? जानिए मध्य प्रदेश के उस गुमनाम गांव की कहानी जो अब बन चुका है टूरिस्ट स्पॉट

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क्या आपने भी 'पंचायत' वेब सीरीज देखते हुए कभी सोचा है कि क्या सच में उत्तर प्रदेश के बलिया में 'फूलेरा' नाम का कोई गांव मौजूद है? अगर हां, तो आपको बता दें कि पर्दे पर दिखने वाला फूलेरा असल में यूपी में नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के एक शांत गांव में बसा है। 'सचिव जी' की वह मशहूर पानी की टंकी से लेकर पंचायत भवन तक, सब कुछ एकदम असली है और आज यह गुमनाम गांव फैंस के लिए एक चहेता टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है।

'फूलेरा' का असली नाम और सटीक लोकेशन

वेब सीरीज में भले ही फूलेरा को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का हिस्सा दिखाया गया है, लेकिन असल जिंदगी में इस गांव का नाम महोड़िया (Mahodiya) है। यह खूबसूरत गांव मध्य प्रदेश के सीहोर (Sehore) जिले में स्थित है, जो राजधानी भोपाल से महज 45 किलोमीटर की दूरी पर है।

शो की रिलीज से पहले महोड़िया एक बेहद आम और शांत गांव था, जहां की अधिकतर आबादी खेती-किसानी पर निर्भर थी। बाहरी दुनिया के लिए इस गांव का कोई खास अस्तित्व नहीं था, लेकिन TVF की सीरीज ने रातों-रात इसकी पहचान बदल दी।

यूपी की कहानी के लिए एमपी का यह गांव ही क्यों चुना गया?

डायरेक्टर दीपक कुमार मिश्रा और उनकी टीम एक ऐसे गांव की तलाश में थी जो आधुनिक झमेलों से दूर हो और जहां 90 के दशक का देहाती अहसास बना रहे। मेकर्स ने मध्य प्रदेश के दर्जनों गांवों का चक्कर काटा, लेकिन महोड़िया पर आकर उनकी तलाश खत्म हुई।

इस गांव का लेआउट, पुराने बने मकान, और शांत माहौल कहानी के बिल्कुल अनुकूल था। इसके अलावा भोपाल के करीब होने की वजह से शूटिंग क्रू के लिए भारी-भरकम कैमरे और लाइट्स जैसी चीजें यहां पहुंचाना काफी आसान था।

महोड़िया में आज भी मौजूद हैं ये आइकॉनिक स्पॉट्स

अगर आप इस गांव में कदम रखेंगे, तो आपको लगेगा कि आप सीधे 'पंचायत' के सेट पर ही आ गए हैं। सीरीज में दिखने वाली लगभग हर मुख्य जगह आज भी वहां जस की तस मौजूद है:

  • पानी की टंकी: वही मशहूर ओवरहेड वॉटर टैंक, जिस पर चढ़कर 'सचिव जी' (जितेन्द्र कुमार) फोन पर बात करते हैं और जहां से पूरा गांव दिखाई देता है।
  • ग्राम पंचायत भवन: गांव का असली सरकारी पंचायत भवन, जिसके बाहर बैठकर प्रधान जी और सचिव जी गांव के मसले सुलझाते हैं।
  • पोखर और मंदिर: गांव के किनारे बना वह शिव मंदिर और उसके पास का तालाब, जहां शाम को प्रहलाद चा, विकास और प्रधान जी बैठकर चाय की चुस्कियां लेते हैं।
  • गांव की पुलिया: एंट्री प्वाइंट पर बनी वही छोटी सी पुलिया, जहां 'बनराकस' (भूषण) और विनोद अपनी गुप्त योजनाएं बनाते नजर आते हैं।

गुमनामी से निकलकर ऐसे बना पॉपुलर टूरिस्ट स्पॉट

'पंचायत' के तीनों सीजन सुपरहिट होने के बाद महोड़िया गांव की लाइफस्टाइल पूरी तरह बदल चुकी है। अब हर वीकेंड पर भोपाल, इंदौर और देश के अलग-अलग कोनों से लोग सिर्फ रील्स बनाने, तस्वीरें खिंचवाने और 'सचिव जी' वाली टंकी देखने यहां पहुंचते हैं।

टूरिज्म बढ़ने से स्थानीय ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। गांव के छोटे दुकानदारों, चाय की टपरियों और समोसे बेचने वालों की कमाई अब पहले से काफी ज्यादा बढ़ गई है। कई स्थानीय ग्रामीण, जिन्होंने शो में साइड रोल किए थे, अब खुद को किसी लोकल सेलिब्रिटी से कम नहीं मानते।

सिनेमा में यह अद्भुत ताकत होती है कि वह किसी दूर-दराज के गुमनाम कोने को भी करोड़ों दिलों की धड़कन बना सकता है। महोड़िया अब सिर्फ मिट्टी और ईंटों से बना गांव नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की यादों का हिस्सा है जो सादगी भरी कहानियों से प्यार करते हैं।


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